Bamboo Farming In Hindi | Bamboo Cultivation | बांस की खेती कैसे करे

नमस्कार दोस्तों Bamboo Farming In Hindi | Bamboo Cultivation में आपका स्वागत है। आज हम बांस की खेती करने की संपूर्ण जानकारी बताने वाले है। हमारे भारत के कई विस्तार और राज्यों के किसान बंजर भूमि या मौसम की मार से बहुत परेशान रहते हैं। उसको आज हम ऐसी जानकारी बताने वाले है। की वह भी बिना पानी के भी कम बारिश में बांस की खेती कर सकते है। यानि बंजर भूमि के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। बांस के पौधों को किसी खास तरह की उपजाऊ जमीन की जरुरत भी नहीं होती है। 

बांस की खेती की बात करे तो चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। मगर कई सालो से किसान बांस की खेती करने से डरते हैं। उसको मध्य नजर रखने के लिए हमारी भारत सरकार की राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत सरकार उस योजना के अंतर्गत किसानों को बांस की खेती करने पर 50 हजार रुपये की सब्सिडी भी देना शुरू किया है। छोटे किसान को भी एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा गया है। तो चलिए Bamboo Farming Project Hindi बताते है।

Introduction to Bamboo Farming

बांस हमारे भारत में व्यावसायिक फसल के रूप में उगाई जाने वाली फसलों में से एक है। उसको ‘गरीब आदमी की लकड़ी’ भी कहते है। दुनिया में भारत बांस का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। एशिया में बांस संस्कृति का सबसे एकीकृत हिस्सा है और उसका प्रयोग लकड़ी के रूप में करते है। उसका प्रयोग मुख्य रूप से निर्माण सामग्री, फर्नीचर, लुगदी और प्लाईवुड के लिए करते है। उसके साथ साथ बांस की टहनियों को भोजन के रूप में करते है। क्योकि वह पोषण का अच्छा स्रोत माना जाता है। भारत में बाँस की तक़रीबन 136 प्रजातियाँ मौजूद हैं। 

Bamboo Farming Photos

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बांस के फायदे एवम उपयोग

  • उसकी कोंपल का काढ़ा बनाकर पीने से सांस का रोग दूर होता है। 
  • बांस के पत्तों से निकले रस को एक्टिव कंपोनेंट होते हैं। 
  • बांस का खूंट से कोलेस्ट्रोल और रक्तचाप घटाने की दवा बनती है।  
  • उसमे एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। 
  • ताजा बांस की कोपलों के सेवन से भूख बढ़ाती है।
  • त्वचा के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है।
  • बांस के सेवन से मधुमेह नियंत्रित होता है।
  • बांस का मुरब्बा और अचार बनता है।
  • उसके अलावा फर्नीचर जीवन उपयगी चीजे बनाई जाती है।

बांस के पोषक तत्व

  • कैलोरीज
  • फैट
  • प्रोटीन
  • कार्बोहाइड्रेट
  • फाइबर
  • शुगर
  • सोडियम
  • पोटैशियम
  • कैल्शियम
  • मैंग्नीज
  • जिंक
  • क्रोमियम
  • कॉपर
  • आयरन
  • नियासिन
  • विटामिन ए
  • थियामिन
  • विटामिन बी
  • विटामिन ई 
  • फर्मेंटेड

Bamboo Farming जलवायु

बांस की खेती गर्म से गर्म समशीतोष्ण जलवायु परिस्थितियों में अच्छी तरह से होती हैं। मगर उसको 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान की आवश्यकता नहीं है। क्योकि बांस की जड़ें पतली होती है। और उसके लिए वृद्धि करने के लिए 15 डिग्री के निचे वातावरण में अच्छा विकास नहीं होता है। यानि बांस तेज हवाओं और ठंडी हवाएं चलते विस्तारो में अच्छे से नहीं होती है। क्योंकि वह हवाएं बांस के पत्तों को मार देती हैं।

Bamboo Cultivation images

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Soil Requirement For Bamboo Farming भूमि और तैयारी

चट्टानी भूमि या मिट्टी को छोड़ बाँस को सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जाता है। बांस की खेती या उसके रोपण के लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतीली मिट्टी से लेकर चिकनी मिट्टी की जरुरत होती है। उस जमीन की पीएच रेंज 4.5 से 6.0 होनी बहुत जरुरी है। भारत में जमीन की बात करें तो बराक घाटी विस्तार सबसे अच्छी मिट्टी और उत्तम जलवायु परिस्थितियों के कारण बांस की खेती अच्छी होती है।

Bamboo Farming Advanced varieties उन्नत किस्में

बांस का खेत
  • बंबूसा पलिडा
  • डेंड्रोकलामस ब्रांडिसि
  • बंबूसा बालकोआ
  • बंबूसा बम्बोस
  • डेंड्रोकलामस हैमिल्टन
  • Bambusa  नूतन
  • Dendrocalamus  गिगेंटस
  • Bambusa  तुलदा
  • बंबूसा वल्गरिस
  • ऑक्सीटेनेंथेरा स्टॉक्सि
  • ओचलैंड्रा ट्रावनकोरिका
  • थ्रोस्टैचिस ओलिवेरि
  • बंबूसा पॉलीमोरफा
  • डेंड्रोकलामस सख्त
  • स्चिज़ोस्ताच्यम डुलोआ
  • मेलोकन्ना बम्बूसोइड्स

Bamboo Farming में रोपण

बांस खेती में कलम कटिंग या राइज़ोम से रोपण या प्रचार किया जाता है। बास को बीजों से भी रोपित कर सकते है। मगर वह बहुत कम देखने को मिलता हैं। बांस के पौधे नर्सरी में उगाए जाते हैं। और एक या एक साल के लिए उन्हें पॉली पॉट्स पर बढ़ने दिया जाता है। उसके पश्यात अंकुर को मुख्य खेत में स्थानांतरित करते है। प्रकंद रोपण विधि में किसानो को ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है।

किसान को एक साल की कलियों को जड़ों सहित खोदकर एक मीटर आकार में काटकर वर्षा ऋतु में लगा है। बांस की रोपाई बरसात के मौसम में होती है। 60+60 के आकार के गड्ढों को 5+4 मीटर की जगह पर नर्सरी में पौधे उगाते है। एक एकड़ भूमि में तक़रीबन 200 पौंधे लगाए जाते है। बांस रोपण का बालयकाल 5 साल है। उसलिए अंतर स्थान 3 वर्षों के समय में अदरक, मिर्च या हल्दी की फसलें उगा सकते है।

बांस की खेती कैसे करे

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Bamboo Farming में सिंचाई

नर्सरी बेड पर बांस उगाने के समय नियमित सिंचाई करनी जरुरी है। पौध रोपण के समय नर्सरी से मुख्य खेत में तुरंत पानी देना चाहिए। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बांस के पेड़ जलभराव के प्रति संवेदनशील होते हैं। उस कारन आपको भारी मॉनसून या बाढ़ के समय मिट्टी को बाहर निकालना चाहिए। पानी के बेहतर उपयोग के लिए आप ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं।

Bamboo Farming Manures and Fertilizers

अच्छी गुणवत्ता और ज्यादा उपज के लिए उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। पौध प्रतिरोपण करते समय खाद और सदी गोबर डालना है। बांस के पौधे भारी फीडर होते हैं। फसल की कटाई के बाद और पौधों की सिंचाई से पहले उर्वरक डालने का सुझाव दिया जाता है। पोटेशियम और नाइट्रोजन उर्वरक के मुख्य घटक हैं। उससे बांस के पेड़ अच्छा विकसित होता हैं। किसान खाद, जैविक खाद, लकड़ी की राख और रासायनिक उर्वरता डाल सकते है। बाँस के पौधों में पत्ती काटने और चूसने वाले कीट लगते हैं। कीटों को नियंत्रित करने कीटनाशकों का प्रयोग करते है।

Bamboo Photo Gallery

बांस की खेती में सरकारी मदद

बांस की खेती में 120 रुपए प्रति प्लांट सरकारी सहायता दी जाती है। उसकी खेती में लगत को सरकार द्वारा 50 % और किसान 50 % वहनकरता है। वह सरकारी योजना में केंद्र सरकार 60 % और राज्य सरकार 40 % की हिस्सेदारी होती है। मगर नार्थ ईस्ट में सरकार 60 % और किसान 40 % लगते है।  उसकी संपूर्ण जानकारी के लिए जिले के नोडल अधिकारी से जानकारी ले सकते हैं।

Harvesting of Bamboo Farming

बांस की फसल कटाई के लिए पांचवें साल में तैयार होती है। व्यावसायिक खेती में छठे साल से कटाई जरुरी है। पहली फसल छठे उसके बाद उसकी कल्मों की कटाई कर सकते है। पांच साल में एक एकड़ बांस के रोपण की लागत 10000 रुपये होती है। और उसकी कटाई छठे साल से शुरू होती है। बांस के बागान से उपज और आय छठे वर्ष से शुरू होकर हर साल बढ़ जाती है। बांस एक नकदी फसल है, उसमे कम गर्भधारण अवधि होती है। उसके कारन तेजी से विकास होता है। और आपको आर्थिक आवक की हर साल के साल बाद बढ़ती रहती है।

Bamboo Photos

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Bamboo Farming Video

Interesting Fact

  • दुनिया भर में बांस की 1400 से अधिक प्रजातियां हैं।
  • बांस की खेती के लिए सरकार की ओर से सरकारी नर्सरी से फ्री में पौधा उपलब्ध होता है।
  • बांस की खेती के लिए प्रति पौधा 120 रुपए सहायता दी जाएगी।
  • बंजर भूमि के लिए बांस की खेती वरदान साबित हो सकती है। 
  • चीन के बाद बांस की खेती में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। 
  • बाँस एक सदाबहार फूल वाला पौधा है जो घास परिवार से संबंधित है। 
  • किसान बांस की खेती करके करोड़ों की कमाई कर सकते हैं। 

FAQ

Q .बांस की खेती से कितना पैसा मिलता है?

प्रति पीस बांस की कलियों का औसत बिक्री मूल्य 100 रुपये होता हैं।

Q .क्या बांस एक अच्छी नकदी फसल है?

हा बांस एक अच्छी नकदी फसल है। 

Q .एक बांस को बढ़ने में कितना समय लगता है?

बांस की फसल को तैयार होने में तक़रीबन पांच साल लगते है। 

Q .बांस की खेत कैसे शुरू करते हैं?

हा कोई भी किसान उसकी जानकारी ले करके कर सकते है। 

Q .बांस का पौधा कहाँ मिलेगा?

बांस की खेती के लिए सरकार की ओर से सरकारी नर्सरी से पौधा उपलब्ध होते है।

Conclusion

आपको मेरा Bamboo Farming | Bamboo Cultivation बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने Bamboo Farming in india, Bamboo Farming profit in india और Bamboo tree से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य किसी खेत उत्पादन के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

Note

आपके पास Bamboo food, Bamboo plant या बांस की नर्सरी कैसे तैयार करें की कोई जानकारी हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है। तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद।

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