Parwal farming परवल की उन्नत तरीके से वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन, जानकारी

Parwal farming in hindi – हमारे देश में परवल का उपयोग सब्जी के रूप में होता रहता है। परवल भारत में बहुत ही प्रसिद्ध सब्जी है। लेकिन आज किसान परवल की खेती करके बहुत अच्छा मुनाफा कमा भी कमा सकते है। आपको बतादे की परवल की खेती पुरे साल भर होती रहती है। जिसके चलते किसान उसकी खेती करके हजारों लाखों रूपये कमा सकते हैं। परवल ज्यादातर उत्तर प्रदेश, जरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आसाम, महाराष्ट और बिहार जैसे राज्यों में उगाया जाता है।

परवल की खेती कद्दू वर्गीय सब्जी फसलो में गिनी जाती है। यह खेती बहुवर्षीय की जाती है। परवल अत्यन्त ही पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक, सुपाच्य और औषधीय गुणों से भरपूर एक बहुत लोकप्रिय सब्जी है। वैसे तो परवल शीतल, हृदय, पित्तानाशक और मूत्र सम्बन्धी रोगियों के लिए बहुत लाभदायक सब्जी है। उसका उपयोग सब्जी, मिठाई और अचार बनाने के लिए किया जाता है। तो चलिए pointed gourd in hindi में प्रोटीन, विटामिन और कार्बोहाइडे्रट से भरपूर परवल की खेती (Parwal farming) कैसे करें की जानकारी बताते है।

Parwal farming के स्वास्थ्य लाभ –

  • पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में परवल मदद करता है।
  • परवल ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करती है।
  • परवल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करके हृदय को स्वस्थ रखता है।
  • कब्ज के इलाज में परवल मदद करता है।
  • परवल विटामिन का अच्छा स्रोत है।
  • वजन घटाने में परवल मदद करता है।
  • परवल रक्त शोधक है।
  • फ्लू के लक्षणों को कम करने में परवल मदद करता है।
  • उम्र बढ़ने से परवल लड़ता है।
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Parwal farming के लिए जलवायु –

परवल की खेती के लिए गर्म और अधिक आर्द्रता वाली जलवायु जरुरी होती है। गर्म क्षेत्रों में परवल की खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है। जिस क्षेत्र में वार्षिक वर्षा 100 से 120 सेंमी हो एव तापक्रम 5 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं होता हो उस क्षेत्र में परवल की खेती बहुत अच्छी होती है। ठंडे विस्तारो में परवल को बहुत कम उगाया जाता है। जहां सिंचाई की सुविधा नही होती है। वहाँ भी परवल की खेती सफलतापूर्वक होती रहती है।

उपयुक्त मिट्टी

परवल की खेती भारी भूमि को छोड़कर किसी भी प्रकार की जमीन में की जा सकती है। गर्म और तर जलवायु वाले क्षेत्रो में बहुत अच्छी तरह से की जाती है। परवल ठन्डे विस्तारो में कम उगाया जाता है। जल निकास वाली जीवांशयुक्त रेतीली और दोमट जमीन परवल के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। अतरू ऊंचेस्थानों पर जिस खेत में जल निकास कि उचित व्यवस्था हो उसी खेत में परवल की खेती करनी चाहिए। अच्छी पैदावार लेने के लिए आपको उसे बलुई दोमट मिट्टी में उगाना सबसे बेहतर होता है। और उसका भूमि का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए।

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Parwal farming के लिए भूमि की तैयारी –

परवल की खेती के लिए खेत को मई-जून के महीनों में खेत को एकबार जुताई कर खुला छोड़ देना चाहिए। जिससे हानिकारक कीड़े-मकोड़े दूर हो जायें एव खरपतवार सुख जायेंगे। बीज की बुवाई के एक महीने पहले जमीन में गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अच्छी तरह से मिलाना चाहिए। बाद में 3 जुताई देशी हल से करके उसके बाद पाटा लगा देना चाहिए। और 1.5 मी.पौधे से पौधे की दुरी रखना एव 30x30x30 से.मी.गहरा गड्डा खोद लेना है।

परवल की प्रजातियां –

प्रजातियां की बात करे तो दो प्रकार की प्रजातियां परवल में पाई जाती है। पहली उन्नतशील प्रजातियां एफ. पी.3, एफ. पी.1, एच. पी.1, एफ. पी.4, एच. पी.3, एच. पी.5 और एच. पी.4 और दूसरी क्षेत्रीय प्रजातियां जिसमे डंडाली, बिहार शरीफ, कल्यानी, गुल्ली, संतोखिया, सोपारी सफेदा और निरिया है। उसके अलावा फैजाबाद परवल 1 , 3 , 4 एव चेस्क सिलेक्शन 1 एवं 2, चेस्क हाइब्रिड 1 एवं 2, छोटा हिली, स्वर्ण रेखा, संकोलिया और स्वर्ण अलौकिक प्रजातियां देखने को मिलती है।

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बुवाई एव पौध रोपण

परवल की बुवाई जड़ो द्वारा होती है जिसे की सकर्स कहा करते है। या कटिंग के रोपाई की जाती है। कटिंग से प्रवर्धन या रोपाई बहुत आसानी से एव स्पीड से होती है। उस से फसल जल्दी तैयार होने के चान्स होते है। परवल में जड़ो की या कटिंग की संख्या रोपाई के मुताबिक रोपाई की दूरी पर निर्भर रहता है। एक मीटर से डेढ़ मीटर दूरी पर 4500 से 5000 और एक मीटर से दो मीटर की दूरी पर 3000 से 4000 जड़े या कटिंग प्रति हेक्टेयर जरुरत होती है।

उस टुकड़ो या कटिंग की लम्बाई एक मीटर से डेढ़ मीटर होना जरुरी एव 8 से 10 गांठो वाले चाहिए है। नालियो यानि गड्ढो की मेड़ों पर 8 से 10 सेंटीमीटर और समतल जमीन पर 3 से 5 सेंटीमीटर गहराई से रोपना होता है। नर एव मादा दोनों को मिक्स लगाना चाहिए। परवल की सब्जी के पौधो की बुवाईवर्ष में दो बार होती है। जिसमे जून एव अगस्त के बिच में और नदियों के किनारे अक्टूबर से नवम्बर महीने में करते है।

Parwal farming में पौधों की सिंचाई

जड़ो या कटिंग की रोपाई के पश्यात नमी के मुताबिक सिंचाई करनी जरुरी है। अगर जरुरत तो 8 से 10 दिन के अंदर पहली सिंचाई करनी चाहिए। मगर ठंड के मौसम में 15 से 20 दिन के बाद और गर्मियों के मौसम में 10 से 12 दिन बाद सिंचाई की जरुरत पड़ती है। अगर बारिश का मौसम है। तो उसे जमीन आप सूखने के पहले सिंचाई करनी चाहिए। परवल के पोधो के अच्छे विकास के लिए टपक सिंचाई में 1 से 2 लिटर पानी प्रति दिन देना चाहिए।

उर्वरक एव खाद –

कम्पोस्ट 70 कि.ग्रा डाई अमोनियम फॉस्फेट या 0.5 टन सड़ी गोबर की खाद और

32 कि.ग्रा. पोटाशियम सल्फेट प्रति एकड़ की दर से जमीन में डालदे।

उसके पश्यात 20 यूरिया रोपण के 20 -25 दिन के अंतराल पर दो बार टाप ड्रेसिंग करें।

और 32 कि.ग्रा पोटाशियम सल्फेट की टाप ड्रेसिंग रोपण के तीन माह बाद करना चाहिए।

farming system

खरपतवार, निकाई , गुड़ाई –

जमीन को निराई-गुड़ाई करके मिटटी पोली करनी चाहिए क्योकि उस से आपकी फसल को पूर्ण रूप से विकसित होने के चान्स सबसे ज्यादा रहते है। आपको बतादे की रोपनी के बाद फल लगने के समय तक आपके खेत को 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए। जिससे आपके रोपनी के बाद और फल लगने के समय तक 4-5 बार निकाई-गुड़ाई करनी चाहिए ताकि लताओं की शाकीय वृद्धि तेजी से हो। लताओं के बढ़ जाने पर इसकी अनावश्यक वृद्धि को रोकने के लिए बार-बार लताओं को हाथ से उलटते-पलटते रहना चाहिए। ऐसा करने से गांठों से जड़ें निकलकर जमीन में प्रवेश नहीं कर पाती है और फलन अधिक होता है। और उसकी गांठों से जड़ें निकलकर मिटटी में नहीं प्रवेश कर सकती एव आपकी फलल अधिक उत्पन्न होती है।

लताओं को सहारा देना एव मचान बनाना

सर्दियों के मौसम में पौधों में नये कल्ले फूटने लगते हैं। उस समय उसे सहारा देने के लिए मचान बनाने का काम शुरू करना चाहिए। दो कतारों के बीच 2 मी. चौड़ाई में 2-2 मी. की दूरी खम्बे लगाना होता हैं। जमीन से 1-1.25 मीटर की ऊँचाई पर बांस या दूसरे कोई भी लकड़ी को सुतली से बांधन हैं। मचान के ऊपर अरहर के डंठलों को फैलाकर सुतली से बाँध देना है। हर कतार के पास 50 सेंमी. खाली रास्ता के लिए रखना है। उसमे निकाई-गुड़ाई, दवा का छिड़काव, सिंचाई और फलों की तुड़ाई होती रहती है। पौधे की लताओं को मचान पर अरहर के डंठलों के सहारे रखना चाहिए इसीलिए मचान मजबूत बनाना जरुरी है।

pointed gourd in hindi

Parwal farming में फलों की तुड़ाई

मार्च महीने से पौधों की बेल पर फल लगना शुरू होते है। उसी फूल से तक़रीबन 10-12 दिनों के पश्यात ही फल तोड़ने लायक होते रहते हैं। मार्च और अप्रैल महीने के बिच में फलों की तोडनी जरुरी है। पहले महीने में प्रति सप्ताह एक बार और दूसरे महीने में प्रति सप्ताह दो बार तुड़ाई करनी जरुरी है। फलों की तोड़ाई मुलायम और हरी अवस्था में सवेरे करनी चाहिए। उस समय फल तोड़ने से फल अधिक समय ताजे रहते हैं।

परवल की उपज –

अच्छी एव उन्नत तौर-तरीके से खेती करने से एव वर्ष में 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर फसल होती है। लेकिन बाद में तीन-चार वर्षो तक 175-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर फलों की उपज होती रहती है। दियारा विस्तारो में परवल का उत्पादन बाढ़ आने के ऊपर निर्भर रहती है। आप जिस तरह से बोते उस पर निर्भर है की परवल की उपज कितनी प्राप्त होती है।

Pointed Gourd photos

कीट नियंत्रण –

  • लाल कटू बीटल से परवल के पौधे को बचाने के लिए 
  • कार्बोरिल 01 मि.ली./ पानी की दर से छिड़काव करेंन होता है।
  • ब्लिस्टर बीटल से परवल के पौधे को बचाने के लिए।
  • मैथाइल पैराथियान, फॉस्फरॉमिडान  या क्यूनाल फास 1 मि.ली / ली.
  • \पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। 
  • पौधे की पत्तियों का झुलसा को रोकने 1.5 ग्राम / ली. पानी की दर से कार्बेन्डाजिम का
  • छिड़काव 10 दिन के अंतराल पर  करना चाहिए। 

रवल की खेती की लागत –

परवल की एक हेक्टेयर में खेती करने से आपको तक़रीबन 20,000/- रूपये का खर्च होता है। अगर 100 क्विंटल परवल की उपज हो तो उसे 500/- रूपये प्रति क्विंटल की कीमत से बेचा जाये तो तक़रीबन कुल 50,000/- रूपये की मुनाफा होता है। जिससे आपको लागत खर्च के बाद बीस हजार रूपये की आमदनी होती है।

Parwal farming Video –

Interesting Fact –

  • भारतीय मूल का परवल बहुवार्षिक सब्जी है।
  • स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण परवल अधिक लोकप्रिय है। 
  • पोषण की दृष्टि से परवल सब्जियों में विशेष स्थान रखता है। 
  • परवल शीतल, पित्तनाशक, शीघ्र पचने वाला, ह्रदय एवं मस्तिक को बलशाली बनाने वाला होता है।
  • सब्जी, अचार और मिठाई बनाने के लिए परवल का उपयोग किया जाता है।
  • विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन से परवल भरपूर होता हैं।
  • परवल तुड़ाई के बाद कई दिनों तक रखने पर भी खराब नहीं होते हैं।

FAQ –

Q : परवल कब लगाया जाता है?

Ans : परवल के पौधो की बुवाई वर्ष में दो बार होती है। जून एव अगस्त के बिच में और अक्टूबर से नवम्बर महीने में करते है।

Q : परवल कैसे लगाया जाता है?

Ans : परवल लगाने के समय नर और मादा पौधों का अनुपात 1:19 होना अनिवार्य है।

Q : परवल कौन सी सब्जी है?

 Ans : हमारे भारत में परवल एक पसंदीदा सब्जी है।

Q : परवल का मीनिंग क्या होता है?

Ans : एक प्रसिद्ध लता। उक्त लता का फल जिसकी तरकारी बनाई जाती है।

Q : परवल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

Ans : Trichosanthes dioica परवल का वैज्ञानिक नाम है। 

Q : परवल को संस्कृत में क्या बोलते हैं?

Ans : संस्कृत में परवर की सब्जी को शाक कहते है।

Q : परवल की सब्जी खाने से क्या फायदा?

Ans : एजिंग को करे नियंत्रित

पाचन में सुधार
ब्‍लड शुगर करे नियंत्रित

कब्‍ज को रखे दूर
इम्‍यूनिटी बढ़ाए

पीलिया में फायदेमंद

वजन घटाने के लिए 

Conclusion –

आपको मेरा Parwal farming बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने parwal seeds , parwal roots online

और parwal plant online से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य किसी खेत उत्पादन के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

Note –

आपके पास how to grow parwal from seeds at home,
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