Potato Farming in Hindi | Potato Cultivation | आलू की उन्नत खेती कैसे करें

नमस्कार दोस्तों Potato Farming | Potato Cultivation मे आपका स्वागत है। आज हम आलू की उन्नत खेती कैसे करें की जानकारी बताने वाले है। आलू विश्व की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। आलू भारत में उपोष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में उगाई जाने वाली एक समशीतोष्ण फसल है। आलू को आमतौर पर गरीबों का दोस्त भी कहते है। क्योकि वह हमेशा के लिए कम दाम में बिकता है। और उसके कारन गरीब भी आलू की सब्जी खरीद सकते है। हमारे भारत देश में करीब 300 से अधिक वर्षों से आलू की खेती हो रही है। भारत में आलू की फसल तमिलनाडु और केरल को छोडकर पुरे देश में उगाया जाता है। 

भारत में आलू की औसत उपज 152 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर है। हमारे देश में सबसे लोकप्रिय फसलों में से एक बन गया है। क्योकि उआलू का प्रयोग खाने के साथ साथ कई औद्योगिक उद्देश्यों जैसे स्टार्च और अल्कोहल के उत्पादन के लिए किया जाता है। आलू स्टार्च का उपयोग लॉन्ड्री में और कपड़ा मिलों में सूत को आकार देने के लिए किया जाता है। आलू का उपयोग डेक्सट्रिन और ग्लूकोज के उत्पादन के लिए भी किया जाता है। उसके अलावा आलू को चिप्स जैसे सूखे उत्पादों में बदल दिया जाता है। और बाद में उपयोग में लिया जाता है।

Potato Farming Information in Hindi

दक्षिण अमेरिका में पैदा हुआ आलू आज पूरी दुनिया में उगाया जाता है। नाइटशेड परिवार या सोलानेसी का सदस्य माना है। आलू दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। आलू विटामिन और मिनरल से भरपूर होते हैं। कच्चे आलू में बहुत सारा पानी और स्टार्च होता है। आलू उगाने के लिए बीज आलू और कंद का प्रयोग होता है। आलू का उपयोग व्यंजनों, चिप्स और औद्योगिक उद्देश्यों जैसे स्टार्च और अल्कोहल के निर्माण के लिए किया जाता है। उसके अलावा किसान आलू की खेती दोगुनी कमाई के लिए करते है।

Potato Cultivation images

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आलू खाने के फायदे एवम उपयोग

  • आलू हर सब्जी के साथ बहुत अच्छे मिल जाता है। 
  • भूने हुए आलू के सेवन से कब्ज की समस्या काम होती है।
  • आलू में सबसे अधिक मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। 
  • विटामिन ए और विटामिन डी की आलू में पर्याप्त मात्रा पाई जाती है।  
  • आंखों के नीचे आलू का पेस्ट या रस लगाने से फायदा होता है। 
  • चमड़ी के रोगों में आलू का इस्तेमाल फायदेमंद होता है
  • आलू का प्रयोग चोट या घाव लगने पर किया जाता है। 
  • चोट लगने पर आलू पीसकर लगाने से फायदा होता है। 
  • झुर्रियों को कम करने के लिए आलू का इस्तेमाल होता है। 
  • चमड़ी के संक्रमण को दूर करने के लिए आलू रस का उपयोग होता है। 
  • आलू में पर्यापत मात्रा में प्रोटीन और खनिज पाए जाते हैं। 
Potato plant images

आलू के पोषक तत्व

  • स्टार्च
  • विटामिन सी
  • विटामिन बी1
  • खनिज 
  • कार्बोहाइड्रेट
  • प्रोटीन
  • वसा
  • कच्चा फाइबर 
  • राख
  • ल्यूसीन
  • ट्रिप्टोफेन
  • आइसोल्यूसीन
  • अमीनो एसिड

Potato Farming जलवायु

आलू समशीतोष्ण जलवायु की फसल है। मगर कई प्रकार की जलवायु में उगती है। आलू सिर्फ ऐसी जलवायु में उगाया जाता है। जहां बढ़ते मौसम में तापमान मध्यम ठंडा होता है। उसके पौधे की वानस्पतिक वृद्धि 24 डिग्री तापमान पर अच्छी होती है। उसके कंद विकास 20 डिग्री पर सबसे अच्छा होता है। उसलिए कारन आलू को पहाड़ियों में गर्मियों की फसल के रूप में एव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय विस्तारो में सर्दियों की फसल के रूप में उगाते है। आलू की फसल को समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई तक उगा सकते है।

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Soil Requirement For Potato Farming भूमि और तैयारी

आलू को लवणीय और क्षारीय मिट्टी को छोड़कर कोई भी की मिट्टी पर उगाया जा सकता है। मिट्टी जो स्वाभाविक रूप से ढीली होती है। कंदों के विस्तार के लिए कम से कम प्रतिरोध प्रदान करती है। उसको प्राथमिकता दी जाती है। आलू की फसल की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी, कार्बनिक पदार्थों से भरपूर 5.2-6.4 पीएच वाली मिट्टी को सबसे अच्छा माना जाता है।

आलू के खेत में क्यारियां 20-25 सें.मी तक गहरी जुताई करके खेत की जुताई कर लेनी चाहिए। उसके बाद दो या तीन बार हैरोिंग करनी चाहिए। दो बार प्लांकिंग ऑपरेशन करके मिट्टी समतल करना है। उसकी बुवाई से पहले मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। रोपण के लिए रिज ​​और फ़रो विधि या समतल क्यारी विधि का उपयोग होता है। 

Potato Farming Advanced varieties उन्नत किस्में

हमारे भारत में किसान आलू की कई किस्मे उगाते है। उसमे कुफरी अलंकार, कुफरी अशोक, कुफरी बादशाह, कुफरी बहार, कुफरी चमत्कार, कुफरी चिप्सोना 2, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी जवाहर, कुफरी पुखराज, कुफरी सतलुज, कुफरी सिन्धुरी, कुफरी सूर्य, कुफरी पुष्कर, कुफरी ज्योति, कुफरी चिप्सोना 1, कुफरी चिप्सोना 3 , कुफरी फ्रायसोना, कुफरी गिरिराज और कुफरी गरिमा शामिल है।

Potato Farming Photos

Potato Farming में रोपण

बुवाई का समय बताए तो अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बुवाई का समय सही पसंद करना चाहिए है। रोपण का सबसे अच्छा समय 30-32 डिग्री तापमान से 18-20 डिग्री के बिच यानि आलू की फसल के लिए बुवाई अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में करनी चाहिए। उसमे देर से पकने वाली फसल के लिए अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक बुवाई कर सकते है।

बुवाई के अंतर की बात करे तो रोपण के लिए कंदों के बीच 20 सेमी और मेड़ों के बीच 60 सेमी दूरी जरुरी है। रोपण की दूरी कंदों के आकार के आधार पर बदलती है। बुवाई की गहराई 6-8 इंच और गहरा गड्ढा खोदकर आलू का टुकड़ा ऊपर की ओर करके लगाएं। बुवाई में ट्रैक्टर से चलने वाले सेमी-ऑटोमैटिक और ऑटोमेटिक प्लांटर का प्रयोग होता है। 

Potato Cultivation

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Potato Farming में सिंचाई

जमीन की नमी के आधार पर बुवाई के तुरंत या 2-3 दिन के पश्यात खेत की सिंचाई जरुरी है। आलू में हल्की और बार-बार सिंचाई सबसे अच्छा विकल्प है। सिचाई में पानी नहीं ठहरना चाहिए। क्योंकि इससे सड़न रोग होता है। मध्यम से भारी मिट्टी में तीन से चार सिंचाई की जरुरत होती है। और रेतीली मिट्टी के लिए 8-12 सिंचाई जरुरी है। दूसरी सिंचाई मिट्टी की नमी के आधार से रोपण के बाद 30 दिनों में करनी चाहिए। उसके बाद की सिंचाई मिट्टी और फसल की जरुरत के मुताबिक करनी चाहिए। कटाई से दस दिन पहले सिंचाई बंद करनी है।

Potato Farming Manures and Fertilizers

रोपण से दो सप्ताह पहले भूमि की तैयारी के समय दो सो क्विंटल एकड़ खेत की खाद या अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर डालनी चाहिए। अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन, यूरिया, फास्फोरस, एसएसपी, पोटाश की आवश्यकता होती है। सभी खाद को किसान अपने खेत  मुताबिक डाल सकता है। ज्यादातर किसानो को अपने खेत के भूमि परीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक ही खाद का उपयोग करना चाहिए। क्योकि सेंद्रिय खाद का ज्यादा प्रयोग भूमि के साथ साथ मनुष्यो के लिए भी अच्छा नहीं है। आपको कोई भी खेती में ज्यादातर सड़ी हुई गोबर ही डालनी चाहिए।

Potato Farming Weed control

आलू के पौधे अंकुरित होने से पहले मेट्रिबुज़िन 70 डब्लयू पी 200 ग्राम प्रति एकड़ या अलाक्लोर 2 लीटर प्रति एकड़ छिड़कना चाहिए। उससे खेत के खाली विस्तार में खपतवार का प्रकोप कम होता है। मैदानी क्षेत्रों में रोपण के पचीस दिन बाद और पहाड़ी विस्तारो में चालीस देना चाहिए। आमतौर पर आलू के पौधे में खरपतवारनाशी की जरुरत नहीं होती है। क्योंकि अर्थिंग अप ऑपरेशन में खरपतवार नष्ट होता हैं। मल्चिंग खरपतवार के प्रकोप को कम करने का तरीका है। धान के पुआल का उपयोग मल्चिंग के लिए कर सकते है।

Potato Cultivation Photos

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पौधे की देखभाल और रोग नियंत्रण

  • एफिड – वयस्क और अप्सरा दोनों ही रस चूसते और पौधा कमजोर होता है। 
  • एफिड के संक्रमण को रोकने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 50 मि.ली मिलाकर छिड़काव करे।
  • कटे कृमि – ये अंकुर को जमीनी स्तर पर काटकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • उसका हमला दिखे तो फसल को क्लोरपाइरीफोस 20% ईसी 2.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। 
  • पत्ता खाने वाली सुंडी – ये आलू के पत्तों को खाते हैं और उससे फसल को नुकसान होता हैं।
  • उसका हमला दिखे तो फसल को क्लोरपाइरीफोस या प्रोफेनोफोस 2 मि.ली पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
  • एपिलांचना बीटल – लार्वा और वयस्क पत्तियों को खाकर फसल को नुकसान करते हैं।
  • उसके लिए कार्बेरिल 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
  • सफेद ग्रब – वह मिट्टी में रहते हैं और जड़ों, तने और कंदों को खाकर फसल को नुकसान करते हैं। 
  • रोकथाम के लिए कार्बोफुरन 3जी@12किलोग्राम बुवाई के समय छिड़काव करना है।
  • आलू कंद कीट – यह खेत के साथ भंडारण में भी मुख्य कीट है।
  • हमला दिखे तो कार्बेरिल 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
  • अर्ली ब्लाइट – निचली पत्तियों पर नेक्रोटिक धब्बे देख सकते है । 
  • उसका हमला दिखे तो मैनकोजेब 30 ग्राम पानी में छिड़काव करना चाहिए।
  • काला धब्बा – कंदों पर काला धब्बा देखा जाता है।
  • रोपण के लिए रोगमुक्त कंदों का प्रयोग करें।

आलू की कटाई और उपज

आलू की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, उस समय अधिकांश पत्तियाँ पीली-भूरी होती हैं। और जमीन पर गिर जाती हैं। उसकी कटाई दस दिन बाद मिट्टी में उचित नमी होने पर करनी चाहिए। फसल की कटाई ट्रैक्टर से खींचे गए आलू खोदने वाले या हाथ से खुरपी की मदद से कर सकते है। कटाई के बाद आलू को जमीन पर फैलाकर छाया में रखते है। उसकी त्वचा को ठीक करने 10 दिनों तक छाया में ढेर में रखना चाहिए।

फसल कटाई के बाद कंदों की छंटाई करें और कटे हुए, घायल कंदों को हटा देना चाहिए। छँटाई के बाद बड़े आकार के कंदों को अलग करले। क्योंकि वे चिप्स बनाने के लिए उपयोगी हैं। आलू को 4° से 7°C के तापमान पर स्टोर करना है। उपज किस्म से किस्म में अलग होती है। लकिन औसत उपज 20 टन / हेक्टेयर या 30 टन / हेक्टेयर है।

आलू खेती की फोटो गैलरी

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Potato FarmingVideo

Interesting Fact

  • आलू भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण फसल है।
  • सब्जियों में आलू का अपना महत्वपूर्ण स्थान है।
  • भारत में आलू की औसत उपज 152 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर है। 
  • आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। 
  • आलू की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका को माना जाता है। 
  • किसान अगेती फसल की बुवाई करके बहुत अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
  • अच्‍छी पैदावार के लिए उन्‍नत किस्‍मों एव रोग रहित बीज की जरुरत है।

FAQ

Q .आलू में पाया जाता है?

आलू में 80- प्रतिशत पानी, स्टार्च, विटामिन्स, चीनी, प्रोटीन, वसा एव खनिज होते हैं।

Q .आलू की खेती कब और कैसे करे?

आलू की फसल के लिए बुवाई अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में करनी चाहिए।

Q .आलू बोने का सही समय क्या है?

अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह

Q .आलू की खेती कैसे की जाती है?

आलू की खेती के लिए बलूई-दोमट मिट्टी ही अच्‍छी होती है। 

Q .एक बीघा में आलू कितना होता है?

125 क्विंटल तक

Conclusion

आपको मेरा Potato Farming | Potato Cultivation बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने Potato Farming time, Potato Farming process और Potato benefits से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य किसी खेत उत्पादन के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

Note

आपके पास Potato recipes, Potato farming india या Aalu ki kheti की कोई जानकारी हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है। तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद।

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