Safed Musli Cultivation Information | सफेद मूसली की खेती, देखभाल और पैदावार

Safed Musli Cultivation Information In Hindi में आपका स्वागत है। आज हम औषधीय गुणों से भर पुर सफेद मूसली की खेती, किस्में, देखभाल और पैदावार की जानकारी बताने वाले है। सफेद मूसली को अलग भाषाओं में अलग नामों से पहचाना जाता है। एक शंसोधन के मुताबिक सफेद मूसली की मांग पुरे साल भर में 35,000 टन उसके सामने उत्पादन सिर्फ 5000 टन ही पाया जाता है। यानि अगर आप बहुत अच्छे से सफ़ेद मूसली की खेती करते है। तो आप बहुत अच्छा मुनाफा निकाल सकते है। 

हमारे भारत देश में राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में सफेद मूसली को उगाया जाता है। यह राज्यों का वातावरण सफेद मूसली को उगाने के लिए बहुत अच्छा और अनुकूल साबित हुआ हैं। पहले तो muesli सिर्फ प्राकृतिक रुप से जंगलों में ही उगता था। लेकिन आज के समय में उन्हें हमारे खेतो में भी उगाया जाता है। और उसकी खेती से हम कृषि तकनीक का उपयोग करके अधिक मात्रा में फसल प्राप्त करके लाखो की कमाई कर सकते है। तो चलिए safed musli plant (मूसली की खेती कैसे करें) की जानकारी शुरू करते है। 

सफेद मूसली की फोटो

Safed Musli Cultivation Information

सफेद मूसली औषधि बहुत जरूरी है। Safed musli farming मूल यानि उसकी जड़े प्रयोग में ली जाती है। यह जड़ी-बूटी किसी भी कारण से होने वाली शारीरिक परेशानी को दूर करने की क्षमता रखती है। मूसली पौष्टिक और बलवर्धक कहा जाता है। उसको शिलाजीत के नाम से भी जाना जाता है। सफेद मूसली का उपयोगी पौधा बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है। लेकिन अब उन्हें किसान खेतो में भी उगाया करते है। सफेद मुसली ( क्लोरोफाइटम बोरीविलियनम एल ) एक औषधीय कंद जड़ वाला पौधा है। उसके फूल सफ़ेद होते है। और 120 सेंटीमीटर जितना पुष्पगुच्छों पर उत्पन्न होते हैं।

यह पौधे में बेहतरीन आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं। हमारे भारत के आज कल उसकी खेती भी शुरू हुई है। सफेद मुसली का वानस्पतिक नाम ह्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम (safed musli botanical name) है। मूसली की फसल व्यावसायिक खेती के लिए भी उगाई जाती है। मुसली उगाने की विधि बहुत सरल एव आसान है। अगर किसीको खेती का कोई अनुभव नहीं है। वह व्यक्ति भी उसे ऊगा सकता है। safed musli ka paudha “शतावरी” के परिवार और “क्लोरोफाइटम” से संबंधित है। अच्छी फसल प्रबंधन पद्धतियों के साथ ज्यादा मुनाफा भी प्राप्त कर सकते है।

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सफ़ेद मुस्ली के स्वास्थ्य लाभ

  • शारीरिक कमजोरी और कई बीमारियों को मूसली दूर करती है। 
  • प्रसव और प्रसवोत्तर समस्याओं मूसली बहुत अच्छी साबित हुई है 
  • आयुर्वेद, यूनानी और एलोपैथिक दवाओं में सफेद मुसली का प्रयोग होता है। 
  • सफेद मुसली तनाव और डिप्रेशन को कम करती है।
  • गठिया के रोगियों के लिए सफेद मुसली का प्रयोग किया जाता है।
  • सफेद मुसली अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। 
  • सफेद मुसली एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी से भरपूर होती है।
  • मधुमेह रोग में सफेद मुसली एक अच्छी दवा है। 
  • सफ़ेद मुसली का इस्तेमाल कामोत्तेजक एजेंट और जीवन शक्ति के रूप में किया जाता है।

उपयुक्त जलवायु

आमतौर पर सफेद मुसली खेती के लिए गर्म तथा आर्दै जलवायु की जरुरत रहती है। इसी लिए ही हमारे उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में सफ़ेद मूसली ज्यादा उगाई जाती है। यानि जून-अगस्त के महीने में या मानसून शुरू होने से पहले ही मूसली के पौधे लगाए जाते है। उस वातावरण में लगाने से उसको अच्छे से विकसित किया जाता है। और सफलता पूर्वक खेती कर सकते है।

सफेद मूसली की तस्वीरें

भूमि का चयन

मुसली एक कंद की फसल है। इसलिए इसे गुणवत्तापूर्ण जड़ों और बेहतर उपज के लिए कार्बनिक पदार्थों से भरपूर बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता रहती है। किसी भी ज्यादा पानी को निकालने के लिए मिट्टी में उचित जल निकासी जगह होनी चाहिए। अगर आप मुसली की बड़े पैमाने पर और व्यावसायिक खेती की योजना बना रहे हैं। तो मिट्टी के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए मिट्टी का परीक्षण भी करना जरुरी है। यह प्रयोग मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने का अवसर प्रदान करता है। मिट्टी का पी एच मान 6.5 से 7.5 होना चाहिए।

Safed Musli में खेत की तैयारी

यह white musli फसल 8 से 9 महीने हुआ करती है। उन्हें जून में रोपा जाता है एव जनवरी से फरवरी में खोद लिया जाता है। उसकी अच्छी खेती के लिए यह जरुरी होता है। की उसकी गर्मी में गहरी जुताई की जाय। आप कर सके तो हरी खाद भी डालियेगा। यह खाद मूसली लगाने के दो महीने पहले डालदे। गोबर की सड़ी खाद 10 टन प्रति हेक्टेयर डालके जुताई से जमीन में मिला दें। खेतों में क्यारिया एक फीट ऊँची एव एक मीटर चौड़ी बनाकर 30 सेंटीमीटर की दूरी पर और 15 सेंटीमीटर पर पौधे से पौधा को लगाना है।

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सफ़ेद मुसली के स्थानीय नाम किस्में

नाम – सफ़ेद मुसली (हिंदी), शेडेवेली (मलयालम), द्रवंती (कन्नड़) द्रवंती (कन्नड़), सफ़ेद मुसली (मराठी), ढोली मुसली (गुजराती), सल्लोगड्डा (तेलुगु), मुसली (संस्कृत) तिरवंतिकम, तन्नीर विट्टंग (तमिल)

किस्मे – RC-5, RC-15, CTI-1, CTI-2 और CTI-17 भारत में उपलब्ध कुछ संकर व्यावसायिक किस्में हैं।

Safed Musli की खेती में बीज दर और बुवाई

मुसली को उगने के लिए कंद या बीज का उपयोग किया जाता है। बीजों का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन बीजों को प्रसिद्ध स्रोतों से प्राप्त करने का प्रयास करें। कंद की एपिडर्मल परत क्षतिग्रस्त हो उसे नहीं  लगाना चाहिए। बीज की दर पौधे से पौधे की दुरी पर निर्भर करता है। 1 एकड़ फसल को रोपने लिए तक़रीबन 400 से 450 किलोग्राम बीज की जरुरत होती है। कीट और रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छा रखने और अच्छी उपज के लिए बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना चाहिए। मूसली के बीजों को ह्यूमिसिल 5 मि.ली./लीटर पानी और डाइथेन-एम 45 @ 5 ग्राम/लीटर पानी से उपचारित करें। बीज की दूरी 10 इंच x 12 इंच हो सकती है।

सफेद मूसली की खेती, देखभाल और पैदावार

सफेद मुसली की खेती में खाद और उर्वरक

यह मूसली की अच्छी फसल के लिए खाद और उर्वरकों डालना जरुरी है। भूमि की तैयारी के समय गाय के गोबर डालना है। और यह गोबर की मात्रा 20 से 25 टन प्रति 1 हेक्टेयर भूमि या 5 से 6 ट्राली गोबर की खाद डालनी चाहिए। उसके साथ हरी खाद जैसे की सेसबनिया, क्रोटेलारिया डालें। मूसली को फास्फोरस और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के हड्डी के खाद की भी जरुरत होती है।

Safed Musli की खेती में सिंचाई

मुसली के पौधे को विकास के समय और पत्तियों के गिरने के समय मिट्टी में निरंतर नमी की जरुरत होती है। सिंचाई की अवधि मिट्टी की क्षमता नमी धारण और जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर रहती है। ज्यादातर मूसली बरसात के मौसम की फसल है। इसलिए इसे बरसात के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता ज्यादा नहीं होती है। लेकिन उचित जल निकासी भी बहुत जरुरी है। पानी की समस्या के मामले में और जड़ प्रणाली में पानी का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए, ड्रिप सिंचाई का विकल्प बहुत अच्छा रहता है। शुष्क मौसम में 2 सप्ताह के अंतराल में सिंचाई जरुरी है।

Safed Musli photo

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अंतरफसल एव देखभाल

सागौन, नीम, आम, पपीता और केले के बागों में आप बहुत आसानी के साथ मूसली की फसल लगा सकते हैं। मूसली की बुवाई से 3 महीने की अवधि बहुत महत्वपूर्ण रहती है। उसकी कोई भी प्रकार की कमी का तुरंत पता लगाया ले और आवश्यक सामग्री को देना चाहिए। जिससे आपकी पैदावार बहुत अच्छी होती है।

Safed Musli के कीट, रोग और नियंत्रण

सफेद मुसली की खेती में ज्यादातर सफेद ग्रब और पत्ती खाने वाली सुंडी प्रमुख कीट हैं।

सफेद ग्रब का नियंत्रण बताये तो उन्हें रोपने के समय एल्ड्रिन @ 25 किग्रा/हेक्टेयर डालन चाहिए । पत्ती खाने वाली सुंडी को नियंत्रित करने हर हप्ते के अंतराल में 0.2% मेटासिड जलीय घोल का छिड़काव करना चाहिए । लाल धब्बे और पत्ती झुलसा से बचाने ने के लिए 25 दिनों के अंतराल 2 बार में 1 ग्राम / लीटर पानी की दर से बेविस्टिन घोल का छिड़काव जरूर करें।

Safed Musli

कंद की खुदाई एव कटाई

सफेद मूसली की फसल तक़रीबन 4 महीने के समय में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फसल की परिपक्वता को पत्तियों के सूखने और गिरने से पहचन सकते है। पत्ती को गिरने के बाद, कंदों को जमीन में ही रहना जरुरी है। उन्हें तोड़ा नहीं है। क्योंकि यह ट्यूब का रंग बदलना शुरू हो जाता है। जिससे ज्यादा मूल्य मिलता है । पत्ती गिरने के बाद कंद हल्के रंग के में तैयार होते हैं। जिन्हे परिपक्व कहा जाता हैं। वह गहरे काले रंग में बदल जाते हैं।

Safed Musli पैदावार

उपज कई कारकों पर निर्भर रहती है जैसे कि मिट्टी के प्रकार, सिंचाई, चुनी हुई खेती, जलवायु और कृषि प्रबंधन प्रथाओं उसमे शामिल है । सुरक्षित एव अच्छी मुसली की खेती में तक़रीबन 2 टन (2000 किग्रा) मांसल जड़/हेक्टेयर प्राप्त कर सकते है। जिससे किसान को 350 से 400 किग्रा तक सूखी सफेद मुसली प्राप्त हो सकती है। सफेद मुसली की खेती में लाभ बताये तो एक एकड़ से रू. 1.50 से 2.50 लाख की कमाई होती।

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Safed Musli Cultivation Information Video

afed Musli Cultivation Information

Interesting Fact –

  • सफेद मूसली 8 से 9 महीने की फसल है। 
  • मूसली पौधे की जड़े कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होती है। 
  • मूसली की जड़ में कार्बोहाइट्रेड, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, पौटेशियम, मैगनिशियम और ग्लूकोस पाया जाता है।
  • बाजार में मूसली 900 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकती है| 
  • सफेद मूसली की कारोबारी खेती जड़ों से की जाती है। 
  • सफेद मूसली मूलतः गर्म तथा आर्दै प्रदेशों का पौधा है। 
  • प्रत्येक पौधों से विकसित कंदों की कुल संख्या 10 से 12 होती है। 

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FAQ –

Q : सफेद मूसली कब उगाई जाती है?

Ans : मूसली  जून-अगस्त के महीने में उगाई जाती है। 

Q : सफ़ेद मुसली की परिपक्वता के लिए कितने दिनों की आवश्यकता होती है?

Ans : 90 दिनो में सफ़ेद मुसली तैयार हो जाती है। 

Q : क्या पंजाब में सफेद मुसली उगाई जा सकती है?

Ans : हा पंजाब में सफेद मुसली उगाई जा सकती है। 

Q : सफ़ेद मुसली की कीमत कितनी है?

Ans : मूसली 900 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकती है।

Q : सफेद मूसली क्या क्या काम आती है?

Ans : सफेद मूसली का उपयोग सेक्स संबंधी समस्याओं के लिए अधिक होता है। 

Conclusion –

आपको मेरा Safed Musli Cultivation Information बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने safed musli farming profit

और safed musli production per acre से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य किसी खेत उत्पादन के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

Note –

आपके पास safed musli contract farming या safed musli crop duration की कोई जानकारी हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है। तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद।

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