Sandalwood Farming | चंदन की खेती की जानकारी | Sandalwood Cultivation

Indian Sandalwood Plantation में आपका स्वागत है। आज हम चंदन की खेती की जानकारी बताने वाले है। चंदन संतलम जीनस में पेड़ों से लकड़ियों का एक वर्ग है। लकड़ी भारी, पीली और महीन दाने वाली होती है। और कई अन्य सुगंधित लकड़ियों के विपरीत, दशकों तक अपनी खुशबू बरकरार रखती है। चंदन की लकड़ी से तेल भी निकाला जाता है। चंदन को दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में से एक के रूप में जाना जाता है।

चंदन का उपयोग सिर्फ हमारे धार्मिक कामों में ही नहीं होता है। मगर कई तरह के beauty and medical product भी बनाए जाते हैं। उसके अलावा धूपबत्ती, अगरबत्ती, साबुन, परफ्यूम आदि में भी उपयोग होता है। आपको बतादे की चंदन की खेती से किसान कम समय में करोड़पति भी बन सकता है। चंदन की लकड़ी में खुशबू के साथ साथ कई औषधीय महत्व भी है। तो चलिए sandalwood in hindi बताते है।

Sandalwood Farming

चंदन की खेती का परिचय दे तो चंदन सदियों से उपयोग की जाने वाली सामग्रियों में से एक है। उसके पेड़ 100 सेमी से 200 सेमी की परिधि के साथ 13 से 16 मीटर की ऊंचाई तक होते है। आदत से परिवर्तनशील आमतौर से सीधा फैलता है। यह पेड़ का सांस्कृतिक महत्व के साथ सतह व्यावसायिक/औषधीय उपयोग भी होता है। हमारे भारत देश में चंदन को श्रीगंधा भी कहते है। भारत में कई राज्यों में चंदन उगाने पर प्रतिबंध के कारण चंदन की मांग बहुत ज्यादा है। लेकिन वर्तमान में कुछ राज्यों से चंदन उगाने से प्रतिबंध को हटा लिया है। अपने क्षेत्र में चंदन उगाने की प्रक्रिया को जानने के लिए जरूर पढ़े। हमारी भारतीय संस्कृति में चंदन का एक अलग स्थान है। क्योकि उसका उपयोग पालने से लेकर श्मशान तक होता है।

सौंदर्य प्रसाधन, दवा, अरोमाथेरेपी, साबुन उद्योग और इत्र में इसके उपयोग के कारण चंदन और sandalwood oil का व्यावसायिक मूल्य बहुत ज्यादा है। विस्व में चंदन की कई किस्में देखने को मिलती हैं। लेकिन भारतीय एव ऑस्ट्रेलियाई चंदन बहुत प्रसिद्ध हैं। चंदन की खेती से किसान को बहुत अधिक मुनाफा होता है। प्राकृतिक रूप से उगाए गए चंदन के पेड़ को तैयार होने में 30 साल लगते हैं। लेकिन जैविक तरीकों से गहन खेती 10 से 15 वर्षों तैयार होने लगते है। भारत में दो रंग के चंदन होते हैं। जो सफेद और लाल रंग होते हैं। चंदन की पत्तियों का उपयोग पशुओं के चारे के लिए भी किया जा सकता है।

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भारत में चंदन के नाम और चंदन की किस्में

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नाम

चंदन का पारिवारिक नाम – संतालेसी

चंदन का वानस्पतिक/वैज्ञानिक नाम – संतालम एल्बम एल

सामान्य नाम – चंदन, सफेद चंदन, संतालम एल्बम, अनिंदिता, शिरीगंधा, अरिष्ट फलम, सरपवसा, भद्राश्रय, गंधासार, थैलापर्ण, मलयजा

किस्में

भारतीय चंदन, ऑस्ट्रेलियाई चंदन सबसे ज्यादा उगाए जाते हैं। लेकिन दुनिया भर में 15 से अधिक किस्में चन्दन की किस्मे देखने को मिलती हैं।

चंदन की खेती के लिए जलवायु

चंदन की फसल को गर्म और आर्द्र जलवायु परिस्थितियों में अच्छी तरह से बढ़ने की आवश्यकता होती है। चंदन के पेड़ के विकास के लिए आदर्श तापमान 12 डिग्री से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बताया जाता है। चंदन पौधों को उगाने के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की जरुरत होती है। चंदन की खेती 500 से 600 मिमी वार्षिक वाले विस्तारो में बहुत आसानी से होती है। उसकी खेती बर्फीले और रेगिस्तान विस्तारो को छोड़ सभी जगहों पर की जा सकती है।

खेती के लिए मिट्टी

चंदन के पेड़ किसी भी अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में अच्छे से हो सकती हैं। लेकिन लाल रेतीली दोमट मिट्टी उनकी वृद्धि और उपज के लिए सबसे अच्छी होती है। आप चंदन की व्यावसायिक खेती की करना चाहते है। तो मिट्टी परीक्षण के लिए से जाने और मिट्टी परीक्षण के परिणामों के आधार पर मिट्टी में पोषक तत्वों की आवश्यकताओं को पूरा करे है। चंदन 6.5 से 7.5 की पीएच रेंज के साथ थोड़ी क्षारीय मिट्टी में बेहतर तरीके से उगता है।

खेती के लिए भूमि की तैयारी

जमीन की मिट्टी को अच्छी तरह से जुताई और खरपतवार मुक्त करने के लिए दो जुताई करें।

मिट्टी या क्यारियों को ऐसे तैयार करें कि भारी बारिश या

बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त पानी जल्दी निकल जाए।

बाद में वह बुवाई के लिए तैयार होती है।

बुवाई का समय

अप्रैल और मई का महीना चंदन की बुवाई के लिए सबसे अच्छा होता है। 

चंदन की बुवाई या रोपण का तरीका

किसान को पौधे बोने से 2x2x2 फीट के गड्ढें खोदकर 10-15 दिनों तक खुल्ला छोड़ देना चाहिए। उसके पश्यात चंदन के पौधे लगाने चाहिए। पौधे लगाने के बाद गड्ढों को अच्छी मिट्टी और सड़ी गोबर खाद के साथ 3:1 अनुपात से मिलाकर भर देंन है। पौधों में हल्का सिंचित करें भी करना है। गर्मियों के मौसम में समय अनुसार सिंचाई करते रहें। मानसून के मौसम में इसके पौधें तेजी से बढ़ते हैं। एक एकड़ जमीन में तक़रीबन 400 पेड़ लगाए जा सकते हैं।

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Sandalwood Farming में सिंचाई

किसान को चंदन की फसल में पानी की जरुरत की बात आती है। तो 2 से 3 सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई की जानी चाहिए। जब पौधे गर्म और गर्मी की जलवायु परिस्थितियों में विकसित होंते है । उस विस्तारो में ड्रिप सिंचाई के लिए जाएं जहां जल स्रोत ज्यादा नहीं है। चंदन के पौधे को बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। पेड़ की जड़ो से अतिरिक्त पानी को निकालना सुनिश्चित करें।

चंदन की खेती में खाद और उर्वरक

कृषि फसल जैविक और रासायनिक उर्वरकों के लिए अच्छी प्रतिक्रिया देती है। मगर औषधीय फसल को बिना किसी रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग के उगाया जाना चाहिए। किसान अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) जैसे बगीचे की खाद, गाय का गोबर, वर्मिन-कम्पोस्ट या हरी पत्तियों से बनी खाद प्रयोग कर सकते है। चंदन की खेती में कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए नीम, चित्रमूल, धतूरा, गौमूत्र आदि से जैव-कीटनाशक तैयार करना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण

चंदन के पेड़ लगाने के पश्यात निराई-गुड़ाई नियमित अंतराल पर करनी जरुरी है।

पौधों के बड़े होने पर कृषि औज़ार या हाथों से ही निराई करना उचित रहती है।

Sandalwood Farming कीट एवं रोग नियंत्रण

चंदन की खेती में सैंडल स्पाइक रोग उसके पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन है। उस रोग में चंदन के पेड़ के ऐंठाकर छोटे हो जाते हैं। उसके पश्यात पेड़ टेड़े-मेढ़े हो जाते हैं। उससे से बचाव के लिए। किसान चंदन के पेड़ से 5 से 7 फीट दूर एक नीम का पौधा भी लगा सकते हैं। नीम का पौधा कई तरह के कीट-पंतगों से चंदन के पेड़ की सुरक्षा करता है । चंदन पौधे के साथ एक नीम का पौधा लगाना बेहतर है।

चंदन की छंटाई और उपज

जब चंदन की खेती में कटाई और कटाई के बाद की बात करे तो चंदन के पेड़ 30 साल बाद कटाई के लिए तैयार होते हैं। चंदन की कटाई के दौरान, नरम लकड़ी को हटा दिया जाता है। और कठोर लकड़ी को काट दिया जाता है। जिसे मिल में पाउडर में बदल दिया जाता है। पाउडर को 2 दिन (48 घंटे) पानी में भिगोने के बाद डिस्टिल्ड करदेते है । इसकी जड़े भी बहुत सुगंधयुक्त होती है। उसके पेड़ को काटने की जगह जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है।

चंदन की खेती की जानकारी

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Sandalwood Farming में लागत और लाभ

उसकी बढ़ती मांग देश और विदेशी में रहती है। उसमे चीन, इंडोनेशिया, अमरिका शामिल हैं। परिपक्व चंदन के पेड़ से 12-20किलो लकड़ी मिलती है। और एक किलो चंदन की कीमत पांच से 6 हजार होती है। उसीलिये एक एकड़ में यदि 300 पेड़ भी लगाए तो एक एकड़ खेत से करीब 2.5 करोड़ रुपए कमा सकते हैं। वैसे 100 चंदन के पेड़ से 15-17 साल के भीतर एक करोड़ रूपये कमा सकते हैं। सफ़ेद चंदन की खेती बहुत लाभदायक है। उस लागत 80 से 1 लाख तक होती है। एव 60 लाख से अधिक मुनाफा मिलता है। उसका परिपक्क्व पेड़ 12-15 साल में काटने लायक होता है।

Sandalwood Farming Video

Interesting Fact

  • राष्ट्रीयकृत बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक चंदन की खेती के लिए लोन उपलब्ध कराती है।
  • सेंत्लम एल्बम किस्म ज्यादा सुगन्धित एव औषधीय गुणों से पूर्ण होती हैं।
  • अप्रैल और मई का महीना चंदन की बुवाई के लिए सबसे अच्छा है।
  • चंदन की खेती से कम समय में करोड़पति बन सकते है।
  • चंदन की सेंत्लम एल्बम,सफ़ेद चन्दन, सेंडल, अबेयाद, श्रीखंड, सुखद संडाल अच्छी किस्में है।
  • उसकी खेती में जैविक खाद की अधिक आवश्यकता नहीं होती है। 

Sandalwood Farming FAQ

Q : चंदन के बीज तथा पौधे कहां पर मिलते हैं?

केंद्र सरकार की लकड़ी विज्ञान तथा तकनीक संस्थान बैंगलोर से पौधे मिलते है। 

Q : चंदन के पेड़ को उगाने में कितना समय लगता है?

चंदन के पेड़ को तैयार होने में 15 साल का समय लगता है। 

Q : चंदन की खेती कैसे शुरू करूं?

खेती की जानकारी प्राप्त करके चंदन की खेती कर सकते है। 

Q : क्या भारत में चंदन का वृक्षारोपण वैध है?

हा कुछ राज्यों में वृक्षारोपण वैध है। 

Q : चंदन के पौधे की कीमत क्या है?

एक किलो चंदन की कीमत पांच से 6 हजार होती है।

Q : चंदन उगाने के लिए अनुमति की आवश्यकता है?

हा चंदन उगाने के लिए कुछ विस्तारो में अनुमति जरुरी है। 

Conclusion

आपको मेरा Sandalwood Farming in Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। 

लेख के जरिये हमने Indian sandalwood growth

और Sandal Plantation, sandalwood tree से सम्बंधित जानकारी दी है।

अगर आपको अन्य किसी खेत उत्पादन के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।

Note

आपके पास sandalwood powder, red sandalwood या चंदन के उपयोग और स्वास्थ्य लाभ की कोई जानकारी हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो दिए गए सवालों के जवाब आपको पता है। तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद।

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